election slider

bigpost old

election2

election

नतिजा लोड हुँदैछ...

nepali date post page

------------- magone theme

postpage template

header

Games युनिकोड मिति रूपान्तरण
मिति लोड हुँदै...
निर्वाचन ५७ दिन बाँकी
EN

labelpost21

लोड हुँदैछ...

labelpost20

लोड हुँदैछ...

labelpost19

लोड हुँदैछ...
लोड हुँदैछ...

labelpost18

labelpost17

लोड हुँदैछ...

labelpost17

लोड हुँदैछ...

labelpost16

labelpost15

labelpost15

labelpost-14

लोड हुँदैछ...

wether

Birgunj --°C Loading...

labelpost7

लोड हुँदैछ...

labelpost6

लोड हुँदैछ...

labelpost5

लोड हुँदैछ...

labelpost4

मुख्य समाचार
लोड हुँदैछ...
अर्थतन्त्र
लोड हुँदैछ...
राजनीति
लोड हुँदैछ...

labelpost3

लोड हुँदैछ...

youtube5

 जनआवाज नेपाल अनलाइन टिभी

Loading 9 latest videos...

के तपाईं आफ्नो छुट्टै खाले मौलिक वेबसाइट, न्यूज पोर्टल, व्यावसायिक वेबसाइट, ई कमर्श वेबसाइट बनाउन चाहनुहुन्छ ? हामी बनाउँछौं भीडभन्दा अलग वेबसाइट । विस्तृत जानकारीको लागि भिजिट गर्नुहोला: https://Neelamb.com, मोबाइल नं.+977-9814272487 (CALL)

youtube-3

भिडियो लोड हुँदैछ...

youtube2

भिडियोहरू लोड हुँदैछन्...

youtube

Loading videos...

तपाईंले यो समाचार पढ्न छुटाउनुभयो

× तपाईंले यो समाचार पढ्न छुटाउनुभयो?
हेडलाइन्स
लोड हुँदैछ...
मुख्य समाचार
लोड हुँदैछ...
मुख्य समाचार
लोड हुँदैछ...
अर्थतन्त्र
लोड हुँदैछ...
राजनीति
लोड हुँदैछ...
अर्थतन्त्र
लोड हुँदैछ...
राजनीति
लोड हुँदैछ...
खेलकुद
लोड हुँदैछ...
अर्थतन्त्र
लोड हुँदैछ...
राजनीति
लोड हुँदैछ...
खेलकुद
लोड हुँदैछ...

three column

समाचार
लोड हुँदैछ...
विचार
लोड हुँदैछ...
खेलकुद
लोड हुँदैछ...

two column news

News

Loading...

Main

Loading...

listpost

लोड हुँदैछ...

नयाँ समाचार

नयाँ समाचार
लोड हुँदैछ...

new news

लोड हुँदैछ...

breaking news

BREAKING NEWS
Loading latest news...

big post

लोड हुँदैछ...
News
Loading...
Breaking News
लोड हुँदैछ...

two column

समाचार
लोड हुँदैछ...
लेख/रचना
लोड हुँदैछ...

आखिर क्या है संख्या 18 का रहस्य, जिसका संबंध भगवान श्रीकृष्ण और महाभारत युद्ध से जुड़ा है

जन्माष्टमी 2021 के इस मौके पर आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसे रहस्य के बारे में, जिसे शायद ही आप जानते हों। महाभारत काल और भगवान श्रीकृष्ण के साथ 18 अंक का बहुत ही गहरा संबंध है। इसी कड़ी में आज हम संख्या 18 की मिस्ट्री को जानेंगे। एक वक्त में हमारी सभ्यता का विकास परम ऊंचाइयों तक पहुंच गया था। ज्ञान, विज्ञान, कला, साहित्य ऐसा कोई क्षेत्र नहीं बचा था, जहां हमने नए नए कीर्तिमानों को स्थापित ना किया हो। हालांकि महाभारत का युद्ध वह मुख्य बिंदु बना, जहां से हमारी सभ्यता का बिखराव शुरू हुआ। आज भी महाभारत काल से जुड़े कई ऐसे रहस्य मौजूद हैं, जिनके ऊपर से अब तक पर्दा नहीं उठ पाया है। उन्हीं में से एक रहस्य है संख्या 18 का। कई लोगों का कहना है कि संख्या 18 का महाभारत के युद्ध में काफी खास महत्व था। आप जब महाभारत के युद्ध का गहराई से अवलोकन करेंगे, तो ये संख्या बार बार आपके सामने आएगी। आइए जानते हैं इसके बारे में -  


पूरे महाभारत के युद्ध में संख्या 18 का काफी खास महत्व था। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कुल 18 दिनों तक गीता का ज्ञान दिया। महाभारत की किताब में कुल मिलाकर 18 ही अध्याय हैं। हिंदू धर्म की महत्वपूर्ण पुस्तक गीता में भी आपको 18 अध्याय देखने को मिलेंगे। इसके अलावा कौरवों और पांडवों की सेना में भी कुल 18 अक्षौहिणी सेना थीं।
महाभारत युद्ध को करवाने में मुख्य रूप से 18 सूत्रधार थे। अंत में जब युद्ध की समाप्ति हुई, तो उस दौरान केवल 18 योद्धा ही बचे थे। महाभारत का युद्ध कुल 18 दिनों तक चला। इस बीच भगवान श्रीकृष्ण ने 18 दिनों तक गीता का ज्ञान अर्जुन को दिया। 
इसी वजह से गीता में कुल 18 अध्याय शामिल हैं। अब सवाल उठता है कि महाभारत युद्ध में बार-बार 18 अंक का दोहराव क्या एक संयोग है? या फिर इसके पीछे कोई गहरा रहस्य छिपा है। हालांकि संयोग ज्यादा से ज्यादा 3 से 4 बार होता है। हर बार नहीं होता।
कई लोगों का कहना है कि संख्या 18 के पीछे एक बहुत बड़ा रहस्य छिपा हुआ है। हालांकि अब तक इस राज से कोई पर्दा नहीं उठा पाया है। अगर भविष्य में कोई महाभारत के इस जटिल रहस्य से पर्दा उठाता है, तो कई नई चीजें सामने आ सकती हैं। महाभारत युद्ध और उसके साथ संबंध रखने वाले संख्या 18 के राज को अब तक कोई नहीं जान पाया है। 
 

मां से बच्चे को मिल रहीं एंटीबॉडीज


कोविड वैक्सीन लगवाने के बाद मांओं से बच्चों में एंटीबॉडी पहुंच रही है। रिसर्च में इसके प्रमाण मिले हैं। यह दावा फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी ने शोधकर्ताओं ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, ब्रेस्टफीडिंग के जरिए मांओं से उनके बच्चों में पहुंचने वाली एंटीबॉडी उन्हें कोरोना से बचा सकती है।

ब्रेस्टफीडिंग जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, वैक्सीन मां और बच्चे दोनों को सुरक्षा दे सकती है। फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर जोसेफ लारकिन कहते हैं, रिसर्च में सामने आया कि वैक्सीन लगवाने के बाद ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली मांओं के दूध में एंटीबॉडीज बढ़ती हैं। जो ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बच्चे में पहुंचती है।

इसलिए कोरोना से लड़ने वाली एंटीबॉडी है जरूरी
शोधकर्ता जोसेफ नियू कहते हैं, जब बच्चा पैदा होता है तो उसका इम्यून सिस्टम पूरी तरह से डेवलप नहीं होता है। संक्रमण से लड़ पाना बच्चे के लिए मुश्किल होता है। ऐसे समय में बच्चे का कुछ खास तरह की वैक्सीन के प्रति रिस्पॉन्स दे पाना मुश्किल हो सकता है। इस उम्र में ब्रेस्टमिल्क बच्चे की इम्युनिटी बढ़ाने का बेहतर विकल्प होता है।

रिसर्च से जुड़ी 3 बड़ी बातें

    अमेरिका में दिसम्बर 2020 से मार्च 2021 के बीच स्वास्थ्यकर्मियों को फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन दी गई। इसमें 21 ऐसी महिला स्वास्थ्यकर्मी थीं जो अपने बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराती थीं और इन्हें कभी भी कोरोना नहीं हुआ था।
    इन 21 मांओं के ब्रेस्ट मिल्क और ब्लड के तीन बार सैम्पल लिए गए। वैक्सीन से पहले, पहले डोज के बाद और तीसरे डोज के बाद। सभी ब्लड और ब्रेस्ट मिल्क के सैम्पल की जांच की गई।
    जांच में सामने आया कि दूसरे डोज के बाद मां के दूध में 100 गुना तक एंटीबॉडी बनीं। इनके सैम्पल्स में एंटीबॉडी का लेवल उन लोगों से भी ज्यादा था जो एक बार संक्रमित हो चुके हैं।

वैक्सीन लगवाने के बाद अनिद्रा और तनाव से बचें

मुम्बई के जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में लेक्टेशन कंसल्टेंट डॉ. मानसी शाह कहती हैं, वैक्सीन लगने के बाद यह पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता है आप कोविड से सुरक्षित हैं, इसलिए बाहर निकलने पर मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना न भूलें। वैक्सीन लगवाने के बाद तनाव न लें और 8 घंटे की नींद जरूर पूरी करें। अल्कोहल से दूरी बनाएं क्योंकि ये इम्यून रिस्पॉन्स को धीमा कर देता है। इसके अलावा शरीर में अल्कोहल का स्तर अधिक होने पर ये बेस्टफीडिंग के जरिए बच्चे में पहुंचकर उसे नुकसान पहुंचा सकता है। जिस जगह वैक्सीन लगी है, वहां दर्द होने पर कपड़े में बर्फ बांधकर सिंकाई कर सकती हैं।

दुनिया की सबसे विचित्र गोभी ऐसी क्यों है


पिरामिड की तरह दिखने वाली दुनिया की विचित्र गोभी पर वैज्ञानिकों ने नई रिसर्च की है। यह गोभी इतनी विचित्र क्यों दिखती है, वैज्ञानिकों ने इसकी वजह बताई है। इसे आम भाषा में रोमनेस्को कॉलीफ्लॉवर और रोमनेस्को ब्रॉकली भी कहा जाता है। यह सेलेक्टिव ब्रीडिंग का बेहतरीन उदाहरण है। इसकी बनावट पर फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च के वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है।

इसलिए होता है पिरामिड जैसा आकार
शोधकर्ता फ्रांस्वा पार्सी का कहना है, इस गोभी के विचित्र दिखने की वजह इसका फूल है। गोभी में मौजूद दानेदार फूल दरअसरल बड़े फूल में तब्दील होना चाहते हैं, लेकिन ऐसा हो नहीं पाता है। इसका निचला हिस्सा तने में तब्दील हो जाता है और ऊपरी हिस्सा कली बनकर रह जाती हैं। ऐसा इतनी बार होता है कि एक कली के ऊपर दूसरी कली चढ़ती जाती है। इस तरह ये पिरामिड जैसे दिखने लगते हैं।

फूल का 3डी-मॉडल तैयार किया
शोधकर्ता एलेक्जेंडर बुक्श कहते हैं, इस गोभी की पिरामिड जैसी आकृति का पता लगाना इसलिए जरूरी था क्योंकि इसमें किसी तरह की बीमारी हो तो उसे सुधारा जा सके। ऐसी आकृति का पता लगाने के लिए गोभी के अलग-अलग फूल का 3डी- मॉडल तैयार किया ताकि इसे बेहतर तरीके से समझा जा सके।

रिसर्च कहती है कि यह गोभी एक फूल की तरह अपनी पहचाने की कोशिश करती है। सामान्य गोभी और रोमनेस्को के फूलों में भी अंतर है। सामान्य गोभी में फूल आपस में काफी सटे रहते हैं जबकि रोमनेस्को कॉलीफ़्लॉवर फूलों की संख्या सामान गोभी के मुकाबले ज्यादा होती है। इनके अलग दिखने की एक वजह यह भी है। इसके फूल पिरामिड जैसे होते हैं जबकि दूसरी गोभी और ब्रॉकली में गोल होते हैं।

विटामिन-सी और के से भरपूर है
रोमनेस्को कॉलिफ्लॉवर में विटामिन-सी और के अलावा फायबर व कैरोटिनॉयड्स पाया जाता है। इसका इस्तेमाल सब्जी और सलाद के तौर पर किया जाता है। यूरोपीय और अमेरिकी देशों में इसकी खेती होती है। अमेरिका में यह 2 हजार से 2200 रुपए किलो की दर पर मिलती है। गोभी की यह प्रजाति पत्तागोभी, ब्रॉकली और काले के साथ उगाई जाती है।

लॉन्ग कोविड से जुड़ी 5 लक्षण


कौन से लक्षण बताते हैं कि मरीज लॉन्ग कोविड का शिकार हो सकता है, इसे समझाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक स्टडी की है। वैज्ञानिकों का कहना है, संक्रमण होने के बाद पहले ही हफ्ते में कोरोना से जुड़े 5 लक्षण दिखते हैं तो मरीज को लॉन्ग कोविड होने का खतरा ज्यादा रहता है। इन 5 लक्षणों में थकान, सिरदर्द, सांस से जुड़ी समस्या, बुखार और पेट से जुड़ी दिक्कतें शामिल हैं।

रिसर्च करने वाली ब्रिटेन की बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, कोरोना पीड़ितों से जुड़े डाटा की मदद से लॉन्ग कोविड के 10 लक्षण भी बताए गए हैं। इनमें सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, जोड़ों में दर्द, सीने में दर्द, डायरिया, स्वाद और खुशबू का न मिल पाना शामिल हैं।

क्या है लॉन्ग कोविड
लॉन्ग कोविड की कोई मेडिकल परिभाषा नहीं है। आसान भाषा में इसका मतलब है शरीर से वायरस जाने के बाद भी कुछ न कुछ लक्षण दिखते रहना। कोविड-19 के जिन मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है, उन्हें महीनों बाद भी समस्याएं हो रही हैं। कोविड-19 से उबरने के बाद भी लक्षणों का लंबे समय तक बने रहना ही लॉन्ग कोविड है।

लॉन्ग कोविड की वजह समझना जरूरी
शोधकर्ता ओलालेकन ली कहते हैं, लॉन्ग कोविड से जूझने वाले मरीज खुद को अकेला महसूस करते हैं। ये अपने आप को बीमार समझते हैं। शोधकर्ता शमिल हरूनी का कहना है, अब तक यह नहीं समझा जा सका है कि क्यों कुछ लोग लॉन्ग कोविड से जूझते हैं। इसलिए जरूरी है कि ऐसे मामलों को जल्द से जल्द समझा जाए।

फेफड़ों की क्षमता घट जाती है
वैज्ञानिकों का कहना है, ऐसा देखा गया है कि हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद सार्स और मेर्स के मरीजों में से 25 फीसदी लोगों के फेफड़े ठीक से काम नहीं करते। इनकी एक्सरसाइज करने की क्षमता में गिरावट आती है। शोधकर्ता मिलेनी कालवर्ट के मुताबिक, लॉन्ग कोविड से जूझने वाले मरीजों में दिखने वाले लक्षणों और कॉम्प्लीकेशंस को गहराई से समझने की जरूरत है।

लॉन्ग कोविड पर यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की न्यूरोसाइंटिस्ट एथेना अक्रमी कहती हैं कि ऐसे मरीजों में आगे कितनी तरह के लक्षण दिखेंगे, इसकी बहुत कम जानकारी मिल पाई है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि जैसे-जैसे समय बीतता है, लक्षण दिखाई देने शुरू हो जाते हैं। ये कितनी गंभीर होंगे और इनका रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा, इसका पता भी बाद में ही चलता है।

कोरोना का संक्रमण होने के 9 महीने बाद भी शरीर में रहती हैं एंटीबॉडीज

कोरोना का एक बार संक्रमण होने के बाद एंटीबॉडीज शरीर में कितने दिनों तक रहती हैं, यह सवाल हमेशा से चर्चा में रहा है। हालिया रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इसका जवाब दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है, संक्रमण के 9 महीने बाद तक शरीर में एंटीबॉडी का लेवल हाई रहता है। चाहें मरीज में संक्रमण के बाद लक्षण दिखे हों या मरीज एसिम्प्टोमैटिक रहा हो। यह दावा इटली की पडुआ यूनिवर्सिटी और लंदन के इम्पीरियल कॉलेज मिलकर की है।

98.8 फीसदी मरीजों में मिली एंटीबॉडीज
पिछले साल फरवरी और मार्च में इटली शहर में 3 हजार कोरोना पीड़ितों के डाटा की एनालिसिस की गई। इनमें से 85 फीसदी मरीजों की जांच की गई। मई और नवम्बर 2020 में एक बार फिर मरीजों में जांच करके एंटीबॉडीज का स्तर देखा गया। जांच में सामने आया कि जो फरवरी और मार्च में संक्रमित हुए थे उनमें से 98.8 फीसदी मरीजों में नवम्बर में भी एंटीबॉडीज पाई गईं।

लक्षण और बिना लक्षणों वालों में एंटीबॉडीज का स्तर एक
इम्पीरियल कॉलेज के रिसर्चर इलेरिया डोरिगाटी का कहना है, रिसर्च के दौरान पाया गया कि लक्षण वाले और बिना लक्षण वाले मरीजों में एंटीबॉडीज का स्तर एक जैसा था। यह बात भी साफ हुई कि कोरोना के लक्षण और संक्रमण कितना गंभीर था, इसका एंटीबॉडीज के स्तर पर कोई असर नहीं पड़ा।

हर 4 में एक पीड़ित ने परिवार में संक्रमण फैलाया
पडुआ यूनिवर्सिटी के रिसर्चर एनरिको लावेज्जो कहते हैं, जिस शहर के लोगों को रिसर्च में शामिल किया था, मई में वहां की 3.5 आबादी संक्रमित हो चुकी थी। इनमें से ज्यादातर एसिम्प्टोमैटिक थे। रिसर्च के दौरान यह सामने आया कि हर 4 में से एक इंसान ने अपने परिवार में संक्रमण फैलाया।

आग कितने प्रकार की होती है?



आग कितने प्रकार की होती है, यह जानने से पहले मैं आपको बताता हूं कि आग क्या होती है?


आग एक तरह की उष्माक्षेपी रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें कोई ईंधन ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके प्रकाश, ऊष्मा और धुआं उत्पन्न करता है।



वास्तव में आग कोई पदार्थ नहीं है। जहां कहीं भी आग लगती है वह अपने आसपास के हवा को गर्म कर देती है।


यह स्पष्ट है कि आग को लगने के लिए ऊष्मा, ईंधन और ऑक्सीजन का होना जरूरी है। अगर इन तीनों में से कोई भी एक तत्व उपस्थित नहीं है तो आग नहीं लगेगी। तकनीकी रूप में इसे फायर ट्रायंगल कहा जाता है।



आग मुख्यतः छह प्रकार की होती है


'A' टाइप - वैसी आग जो मुख्यतः ठोस ईंधनों जैसे लकड़ी, पेपर, कपड़ा, रबड़ आदि के कारण लगती है उसे हम 'A' टाइप आग कहते हैं। सांकेतिक रूप में इसे एक त्रिभुज के अंदर अक्षर 'A' को दिखाया जाता है।

'B' टाइप - वैसी आग जो मुख्यतः द्रव ईंधनों जैसे पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, आयल, पेंट इत्यादि के कारण लगती है उसे हम 'B' टाइप आग कहते हैं। अमेरिका में गैस के कारण लगने वाली आग को भी इसी श्रेणी में रखा जाता है। सांकेतिक रूप में इसे एक आयत के अंदर अक्षर 'B' को दर्शाया जाता है।

'C' टाइप - यूरोपीय और ऑस्ट्रेलियाई मानकों के अनुसार वैसी आग जो गैस ईंधनों जैसे मेथेन, एथेन, प्रोपेन, ब्यूटेन, हाइड्रोजन, अमोनिया इत्यादि के कारण लगती है उसे हम 'B' टाइप आग कहते हैं। वहीं अमेरिकी मानक के अनुसार वैसी आग जो विद्युत के कारण लगती है उसे हम 'C' टाइप आग कहते हैं। सांकेतिक रूप में इसे एक वृत्त के अंदर अक्षर 'C' को दर्शाया जाता है।

'D' टाइप - वैसी आग जो मुख्यतः धातु जैसे पोटैशियम, मैग्निशियम, एलुमिनियम, सोडियम इत्यादि के कारण लगती है उसे हम टाइप 'C' आग कहते हैं। सांकेतिक रूप में इसे एक स्टार के अंदर अक्षर 'C' दर्शाया जाता है।

'E' टाइप - यूरोपीय और ऑस्ट्रेलियाई मानकों के अनुसार वैसी आग जो विद्युत के कारण लगती है उसे 'E' टाइप आग कहते हैं। अमेरिका में 'E' टाइप की कोई श्रेणी नहीं है।

'F' टाइप - यूरोपीय और ऑस्ट्रेलियाई मानकों के अनुसार वैसी आग जो कुकिंग ऑयलों और वसा के कारण लगती है उसे 'F' टाइप आग कहा जाता है। वहीं अमेरिका में इसे 'K' टाइप की श्रेणी में रखा जाता है।

आशा है जानकारी आपको रोचक लगी होगी। सभी चित्र गूगल से लिए गए हैं।

- गोकुल भारद्वाज


If you have lizard at home, you can have a serious disease.


For good health, the house should be kept clean. On the wall of the house, the mouse can be seen walking freely. Many are afraid of mouse but some people ignore this little creature has no problem. But lizard is very harmful to our health. lizard is a dangerous organism, causing serious problems in the baby and your health. Learn some interesting things related to lizard. lizard existed before man on earth. Mousuli has a history since dinosaurs. The lizard found at home is a species of gay. lizard has more than 5 thousand species. Only the gay species of chuparo makes the tower-tower sound from the neck. Disease that can be caused by lizard: The fertilizer of the gay species is very dangerous for human health. Feces are deadly for children. Their feces can be easily seen on the walls and grounds of the house. Mousuli's fertilizer and a bacteria called Salmonella. This is why the risk of food poisoning increases. If lizard falls into food and eats that food, people can die and sometimes have a serious disease. Many people get angry with the sound of lizard. Mousuli being at home is very harmful to the health of a child. Hence, the way to get rid of lizard should be followed. Put garlic on the windows and doors of the house. Apart from this, if you grind garlic and mix its juice in water and sprinkle it in the house, the mouse will run away. Mixing pepper and chili dust in water and sprinkle on the wall and corner of the house, the mouse will run away. We have heard that lizard peacocks will run away but it has no scientific basis yet but this remedy can also be adopted. Mouse can't tolerate the smell of egg bakra.

Glass bridge built in Bihar


A glass bridge has been built like China in India, Bihar. Rajgir of Bihar is the favorite place for tourists. Here tourists come from abroad as well as India. This place is very popular that covers Indian history and the heritage of Lord Buddha. Glass bridge is ready like made here in China.

This is the first lead bridge in eastern India, prepared by Bihar government for tourists. A glass skywalk bridge is also built in Rajgir based on a 120 meter tall glass bridge built in Hangzhou province of China. Walking on this bridge is so scary.

Rajgir is known for natural beauty. Bihar government's tourism department has decided to build Nature Safari Park to promote tourism around this bridge. Zoo Safari, Butterfly Park, Ayurvedic Park, different species of trees can be seen here in Rajgir.

Preparing to open this first lead bridge in the new year. Also, a plantway is also being constructed at the cost of millions of rupees, which can be easily reached to the world peace stupa.