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आखिर क्या है संख्या 18 का रहस्य, जिसका संबंध भगवान श्रीकृष्ण और महाभारत युद्ध से जुड़ा है

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जन्माष्टमी 2021 के इस मौके पर आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसे रहस्य के बारे में, जिसे शायद ही आप जानते हों। महाभारत काल और भगवान श्रीकृष्ण के साथ 18 अंक का बहुत ही गहरा संबंध है। इसी कड़ी में आज हम संख्या 18 की मिस्ट्री को जानेंगे। एक वक्त में हमारी सभ्यता का विकास परम ऊंचाइयों तक पहुंच गया था। ज्ञान, विज्ञान, कला, साहित्य ऐसा कोई क्षेत्र नहीं बचा था, जहां हमने नए नए कीर्तिमानों को स्थापित ना किया हो। हालांकि महाभारत का युद्ध वह मुख्य बिंदु बना, जहां से हमारी सभ्यता का बिखराव शुरू हुआ। आज भी महाभारत काल से जुड़े कई ऐसे रहस्य मौजूद हैं, जिनके ऊपर से अब तक पर्दा नहीं उठ पाया है। उन्हीं में से एक रहस्य है संख्या 18 का। कई लोगों का कहना है कि संख्या 18 का महाभारत के युद्ध में काफी खास महत्व था। आप जब महाभारत के युद्ध का गहराई से अवलोकन करेंगे, तो ये संख्या बार बार आपके सामने आएगी। आइए जानते हैं इसके बारे में -   पूरे महाभारत के युद्ध में संख्या 18 का काफी खास महत्व था। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कुल 18 दिनों तक गीता का ज्ञान दिया। महाभारत की किताब में कुल मिलाकर 18 ही अध्याय हैं। हिंदू धर्म क...

मां से बच्चे को मिल रहीं एंटीबॉडीज

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कोविड वैक्सीन लगवाने के बाद मांओं से बच्चों में एंटीबॉडी पहुंच रही है। रिसर्च में इसके प्रमाण मिले हैं। यह दावा फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी ने शोधकर्ताओं ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, ब्रेस्टफीडिंग के जरिए मांओं से उनके बच्चों में पहुंचने वाली एंटीबॉडी उन्हें कोरोना से बचा सकती है। ब्रेस्टफीडिंग जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, वैक्सीन मां और बच्चे दोनों को सुरक्षा दे सकती है। फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर जोसेफ लारकिन कहते हैं, रिसर्च में सामने आया कि वैक्सीन लगवाने के बाद ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली मांओं के दूध में एंटीबॉडीज बढ़ती हैं। जो ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बच्चे में पहुंचती है। इसलिए कोरोना से लड़ने वाली एंटीबॉडी है जरूरी शोधकर्ता जोसेफ नियू कहते हैं, जब बच्चा पैदा होता है तो उसका इम्यून सिस्टम पूरी तरह से डेवलप नहीं होता है। संक्रमण से लड़ पाना बच्चे के लिए मुश्किल होता है। ऐसे समय में बच्चे का कुछ खास तरह की वैक्सीन के प्रति रिस्पॉन्स दे पाना मुश्किल हो सकता है। इस उम्र में ब्रेस्टमिल्क बच्चे की इम्युनिटी बढ़ाने का बेहतर विकल्प होता है। रिसर्च ...

दुनिया की सबसे विचित्र गोभी ऐसी क्यों है

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पिरामिड की तरह दिखने वाली दुनिया की विचित्र गोभी पर वैज्ञानिकों ने नई रिसर्च की है। यह गोभी इतनी विचित्र क्यों दिखती है, वैज्ञानिकों ने इसकी वजह बताई है। इसे आम भाषा में रोमनेस्को कॉलीफ्लॉवर और रोमनेस्को ब्रॉकली भी कहा जाता है। यह सेलेक्टिव ब्रीडिंग का बेहतरीन उदाहरण है। इसकी बनावट पर फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च के वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है। इसलिए होता है पिरामिड जैसा आकार शोधकर्ता फ्रांस्वा पार्सी का कहना है, इस गोभी के विचित्र दिखने की वजह इसका फूल है। गोभी में मौजूद दानेदार फूल दरअसरल बड़े फूल में तब्दील होना चाहते हैं, लेकिन ऐसा हो नहीं पाता है। इसका निचला हिस्सा तने में तब्दील हो जाता है और ऊपरी हिस्सा कली बनकर रह जाती हैं। ऐसा इतनी बार होता है कि एक कली के ऊपर दूसरी कली चढ़ती जाती है। इस तरह ये पिरामिड जैसे दिखने लगते हैं। फूल का 3डी-मॉडल तैयार किया शोधकर्ता एलेक्जेंडर बुक्श कहते हैं, इस गोभी की पिरामिड जैसी आकृति का पता लगाना इसलिए जरूरी था क्योंकि इसमें किसी तरह की बीमारी हो तो उसे सुधारा जा सके। ऐसी आकृति का पता लगाने के लिए गोभी के अलग-अलग फूल का 3डी- मॉडल तैय...

लॉन्ग कोविड से जुड़ी 5 लक्षण

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कौन से लक्षण बताते हैं कि मरीज लॉन्ग कोविड का शिकार हो सकता है, इसे समझाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक स्टडी की है। वैज्ञानिकों का कहना है, संक्रमण होने के बाद पहले ही हफ्ते में कोरोना से जुड़े 5 लक्षण दिखते हैं तो मरीज को लॉन्ग कोविड होने का खतरा ज्यादा रहता है। इन 5 लक्षणों में थकान, सिरदर्द, सांस से जुड़ी समस्या, बुखार और पेट से जुड़ी दिक्कतें शामिल हैं। रिसर्च करने वाली ब्रिटेन की बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, कोरोना पीड़ितों से जुड़े डाटा की मदद से लॉन्ग कोविड के 10 लक्षण भी बताए गए हैं। इनमें सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, जोड़ों में दर्द, सीने में दर्द, डायरिया, स्वाद और खुशबू का न मिल पाना शामिल हैं। क्या है लॉन्ग कोविड लॉन्ग कोविड की कोई मेडिकल परिभाषा नहीं है। आसान भाषा में इसका मतलब है शरीर से वायरस जाने के बाद भी कुछ न कुछ लक्षण दिखते रहना। कोविड-19 के जिन मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है, उन्हें महीनों बाद भी समस्याएं हो रही हैं। कोविड-19 से उबरने के बाद भी लक्षणों का लंबे समय तक बने रहना ही लॉन्ग कोविड है। लॉन्ग कोविड की वजह सम...

कोरोना का संक्रमण होने के 9 महीने बाद भी शरीर में रहती हैं एंटीबॉडीज

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कोरोना का एक बार संक्रमण होने के बाद एंटीबॉडीज शरीर में कितने दिनों तक रहती हैं, यह सवाल हमेशा से चर्चा में रहा है। हालिया रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इसका जवाब दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है, संक्रमण के 9 महीने बाद तक शरीर में एंटीबॉडी का लेवल हाई रहता है। चाहें मरीज में संक्रमण के बाद लक्षण दिखे हों या मरीज एसिम्प्टोमैटिक रहा हो। यह दावा इटली की पडुआ यूनिवर्सिटी और लंदन के इम्पीरियल कॉलेज मिलकर की है। 98.8 फीसदी मरीजों में मिली एंटीबॉडीज पिछले साल फरवरी और मार्च में इटली शहर में 3 हजार कोरोना पीड़ितों के डाटा की एनालिसिस की गई। इनमें से 85 फीसदी मरीजों की जांच की गई। मई और नवम्बर 2020 में एक बार फिर मरीजों में जांच करके एंटीबॉडीज का स्तर देखा गया। जांच में सामने आया कि जो फरवरी और मार्च में संक्रमित हुए थे उनमें से 98.8 फीसदी मरीजों में नवम्बर में भी एंटीबॉडीज पाई गईं। लक्षण और बिना लक्षणों वालों में एंटीबॉडीज का स्तर एक इम्पीरियल कॉलेज के रिसर्चर इलेरिया डोरिगाटी का कहना है, रिसर्च के दौरान पाया गया कि लक्षण वाले और बिना लक्षण वाले मरीजों में एंटीबॉडीज का स्तर एक जैसा था। यह बात भी स...

आग कितने प्रकार की होती है?

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आग कितने प्रकार की होती है, यह जानने से पहले मैं आपको बताता हूं कि आग क्या होती है? आग एक तरह की उष्माक्षेपी रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें कोई ईंधन ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके प्रकाश, ऊष्मा और धुआं उत्पन्न करता है। वास्तव में आग कोई पदार्थ नहीं है। जहां कहीं भी आग लगती है वह अपने आसपास के हवा को गर्म कर देती है। यह स्पष्ट है कि आग को लगने के लिए ऊष्मा, ईंधन और ऑक्सीजन का होना जरूरी है। अगर इन तीनों में से कोई भी एक तत्व उपस्थित नहीं है तो आग नहीं लगेगी। तकनीकी रूप में इसे फायर ट्रायंगल कहा जाता है। आग मुख्यतः छह प्रकार की होती है 'A' टाइप - वैसी आग जो मुख्यतः ठोस ईंधनों जैसे लकड़ी, पेपर, कपड़ा, रबड़ आदि के कारण लगती है उसे हम 'A' टाइप आग कहते हैं। सांकेतिक रूप में इसे एक त्रिभुज के अंदर अक्षर 'A' को दिखाया जाता है। 'B' टाइप - वैसी आग जो मुख्यतः द्रव ईंधनों जैसे पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, आयल, पेंट इत्यादि के कारण लगती है उसे हम 'B' टाइप आग कहते हैं। अमेरिका में गैस के कारण लगने वाली आग को भी इसी श्रेणी में रखा जाता है। सांकेतिक रूप में इसे एक आयत क...

If you have lizard at home, you can have a serious disease.

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For good health, the house should be kept clean. On the wall of the house, the mouse can be seen walking freely. Many are afraid of mouse but some people ignore this little creature has no problem. But lizard is very harmful to our health. lizard is a dangerous organism, causing serious problems in the baby and your health. Learn some interesting things related to lizard. lizard existed before man on earth. Mousuli has a history since dinosaurs. The lizard found at home is a species of gay. lizard has more than 5 thousand species. Only the gay species of chuparo makes the tower-tower sound from the neck. Disease that can be caused by lizard: The fertilizer of the gay species is very dangerous for human health. Feces are deadly for children. Their feces can be easily seen on the walls and grounds of the house. Mousuli's fertilizer and a bacteria called Salmonella. This is why the risk of food poisoning increases. If lizard falls into food and eats that food, people can die and so...

Glass bridge built in Bihar

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A glass bridge has been built like China in India, Bihar. Rajgir of Bihar is the favorite place for tourists. Here tourists come from abroad as well as India. This place is very popular that covers Indian history and the heritage of Lord Buddha. Glass bridge is ready like made here in China. This is the first lead bridge in eastern India, prepared by Bihar government for tourists. A glass skywalk bridge is also built in Rajgir based on a 120 meter tall glass bridge built in Hangzhou province of China. Walking on this bridge is so scary. Rajgir is known for natural beauty. Bihar government's tourism department has decided to build Nature Safari Park to promote tourism around this bridge. Zoo Safari, Butterfly Park, Ayurvedic Park, different species of trees can be seen here in Rajgir. Preparing to open this first lead bridge in the new year. Also, a plantway is also being constructed at the cost of millions of rupees, which can be easily reached to the world peace stupa.