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दुनिया की सबसे विचित्र गोभी ऐसी क्यों है


पिरामिड की तरह दिखने वाली दुनिया की विचित्र गोभी पर वैज्ञानिकों ने नई रिसर्च की है। यह गोभी इतनी विचित्र क्यों दिखती है, वैज्ञानिकों ने इसकी वजह बताई है। इसे आम भाषा में रोमनेस्को कॉलीफ्लॉवर और रोमनेस्को ब्रॉकली भी कहा जाता है। यह सेलेक्टिव ब्रीडिंग का बेहतरीन उदाहरण है। इसकी बनावट पर फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च के वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है।

इसलिए होता है पिरामिड जैसा आकार
शोधकर्ता फ्रांस्वा पार्सी का कहना है, इस गोभी के विचित्र दिखने की वजह इसका फूल है। गोभी में मौजूद दानेदार फूल दरअसरल बड़े फूल में तब्दील होना चाहते हैं, लेकिन ऐसा हो नहीं पाता है। इसका निचला हिस्सा तने में तब्दील हो जाता है और ऊपरी हिस्सा कली बनकर रह जाती हैं। ऐसा इतनी बार होता है कि एक कली के ऊपर दूसरी कली चढ़ती जाती है। इस तरह ये पिरामिड जैसे दिखने लगते हैं।

फूल का 3डी-मॉडल तैयार किया
शोधकर्ता एलेक्जेंडर बुक्श कहते हैं, इस गोभी की पिरामिड जैसी आकृति का पता लगाना इसलिए जरूरी था क्योंकि इसमें किसी तरह की बीमारी हो तो उसे सुधारा जा सके। ऐसी आकृति का पता लगाने के लिए गोभी के अलग-अलग फूल का 3डी- मॉडल तैयार किया ताकि इसे बेहतर तरीके से समझा जा सके।

रिसर्च कहती है कि यह गोभी एक फूल की तरह अपनी पहचाने की कोशिश करती है। सामान्य गोभी और रोमनेस्को के फूलों में भी अंतर है। सामान्य गोभी में फूल आपस में काफी सटे रहते हैं जबकि रोमनेस्को कॉलीफ़्लॉवर फूलों की संख्या सामान गोभी के मुकाबले ज्यादा होती है। इनके अलग दिखने की एक वजह यह भी है। इसके फूल पिरामिड जैसे होते हैं जबकि दूसरी गोभी और ब्रॉकली में गोल होते हैं।

विटामिन-सी और के से भरपूर है
रोमनेस्को कॉलिफ्लॉवर में विटामिन-सी और के अलावा फायबर व कैरोटिनॉयड्स पाया जाता है। इसका इस्तेमाल सब्जी और सलाद के तौर पर किया जाता है। यूरोपीय और अमेरिकी देशों में इसकी खेती होती है। अमेरिका में यह 2 हजार से 2200 रुपए किलो की दर पर मिलती है। गोभी की यह प्रजाति पत्तागोभी, ब्रॉकली और काले के साथ उगाई जाती है।

लॉन्ग कोविड से जुड़ी 5 लक्षण


कौन से लक्षण बताते हैं कि मरीज लॉन्ग कोविड का शिकार हो सकता है, इसे समझाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक स्टडी की है। वैज्ञानिकों का कहना है, संक्रमण होने के बाद पहले ही हफ्ते में कोरोना से जुड़े 5 लक्षण दिखते हैं तो मरीज को लॉन्ग कोविड होने का खतरा ज्यादा रहता है। इन 5 लक्षणों में थकान, सिरदर्द, सांस से जुड़ी समस्या, बुखार और पेट से जुड़ी दिक्कतें शामिल हैं।

रिसर्च करने वाली ब्रिटेन की बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, कोरोना पीड़ितों से जुड़े डाटा की मदद से लॉन्ग कोविड के 10 लक्षण भी बताए गए हैं। इनमें सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, जोड़ों में दर्द, सीने में दर्द, डायरिया, स्वाद और खुशबू का न मिल पाना शामिल हैं।

क्या है लॉन्ग कोविड
लॉन्ग कोविड की कोई मेडिकल परिभाषा नहीं है। आसान भाषा में इसका मतलब है शरीर से वायरस जाने के बाद भी कुछ न कुछ लक्षण दिखते रहना। कोविड-19 के जिन मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है, उन्हें महीनों बाद भी समस्याएं हो रही हैं। कोविड-19 से उबरने के बाद भी लक्षणों का लंबे समय तक बने रहना ही लॉन्ग कोविड है।

लॉन्ग कोविड की वजह समझना जरूरी
शोधकर्ता ओलालेकन ली कहते हैं, लॉन्ग कोविड से जूझने वाले मरीज खुद को अकेला महसूस करते हैं। ये अपने आप को बीमार समझते हैं। शोधकर्ता शमिल हरूनी का कहना है, अब तक यह नहीं समझा जा सका है कि क्यों कुछ लोग लॉन्ग कोविड से जूझते हैं। इसलिए जरूरी है कि ऐसे मामलों को जल्द से जल्द समझा जाए।

फेफड़ों की क्षमता घट जाती है
वैज्ञानिकों का कहना है, ऐसा देखा गया है कि हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद सार्स और मेर्स के मरीजों में से 25 फीसदी लोगों के फेफड़े ठीक से काम नहीं करते। इनकी एक्सरसाइज करने की क्षमता में गिरावट आती है। शोधकर्ता मिलेनी कालवर्ट के मुताबिक, लॉन्ग कोविड से जूझने वाले मरीजों में दिखने वाले लक्षणों और कॉम्प्लीकेशंस को गहराई से समझने की जरूरत है।

लॉन्ग कोविड पर यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की न्यूरोसाइंटिस्ट एथेना अक्रमी कहती हैं कि ऐसे मरीजों में आगे कितनी तरह के लक्षण दिखेंगे, इसकी बहुत कम जानकारी मिल पाई है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि जैसे-जैसे समय बीतता है, लक्षण दिखाई देने शुरू हो जाते हैं। ये कितनी गंभीर होंगे और इनका रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा, इसका पता भी बाद में ही चलता है।

कोरोना का संक्रमण होने के 9 महीने बाद भी शरीर में रहती हैं एंटीबॉडीज

कोरोना का एक बार संक्रमण होने के बाद एंटीबॉडीज शरीर में कितने दिनों तक रहती हैं, यह सवाल हमेशा से चर्चा में रहा है। हालिया रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इसका जवाब दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है, संक्रमण के 9 महीने बाद तक शरीर में एंटीबॉडी का लेवल हाई रहता है। चाहें मरीज में संक्रमण के बाद लक्षण दिखे हों या मरीज एसिम्प्टोमैटिक रहा हो। यह दावा इटली की पडुआ यूनिवर्सिटी और लंदन के इम्पीरियल कॉलेज मिलकर की है।

98.8 फीसदी मरीजों में मिली एंटीबॉडीज
पिछले साल फरवरी और मार्च में इटली शहर में 3 हजार कोरोना पीड़ितों के डाटा की एनालिसिस की गई। इनमें से 85 फीसदी मरीजों की जांच की गई। मई और नवम्बर 2020 में एक बार फिर मरीजों में जांच करके एंटीबॉडीज का स्तर देखा गया। जांच में सामने आया कि जो फरवरी और मार्च में संक्रमित हुए थे उनमें से 98.8 फीसदी मरीजों में नवम्बर में भी एंटीबॉडीज पाई गईं।

लक्षण और बिना लक्षणों वालों में एंटीबॉडीज का स्तर एक
इम्पीरियल कॉलेज के रिसर्चर इलेरिया डोरिगाटी का कहना है, रिसर्च के दौरान पाया गया कि लक्षण वाले और बिना लक्षण वाले मरीजों में एंटीबॉडीज का स्तर एक जैसा था। यह बात भी साफ हुई कि कोरोना के लक्षण और संक्रमण कितना गंभीर था, इसका एंटीबॉडीज के स्तर पर कोई असर नहीं पड़ा।

हर 4 में एक पीड़ित ने परिवार में संक्रमण फैलाया
पडुआ यूनिवर्सिटी के रिसर्चर एनरिको लावेज्जो कहते हैं, जिस शहर के लोगों को रिसर्च में शामिल किया था, मई में वहां की 3.5 आबादी संक्रमित हो चुकी थी। इनमें से ज्यादातर एसिम्प्टोमैटिक थे। रिसर्च के दौरान यह सामने आया कि हर 4 में से एक इंसान ने अपने परिवार में संक्रमण फैलाया।

कोविड के इलाज ने लोगों को गरीब बना दिया है

कोरोना ने देश के लोगों को भीषण गरीबी में धकेल दिया है. लोग गरीब से और अधिक गरीब होते जा रहे हैं. हाल ही में एसबीआई SBI की एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था कि देश में इस साल लोगों ने 66,000 करोड़ रुपये अस्पतालों पर अतिरिक्त खर्च किए हैं.

कोरोना के कहर ने देश को तबाह कर दिया है. देश के परिवारों ने अपने लोगों को खोया है. वहीं दूसरी तरफ जिन परिवारों में इस बीमारी ने तांडव मचाया है, उस परिवार में आर्थिक परेशानी में उसकी कमर तोड़ दी है. जो पैसे उन्होंने घर खरीदने, शिक्षा पर खर्च करने या सैर पर जाने के लिए बचा कर रखे थे, वह ऑक्सीजन खरीदन, अस्पताल में भर्ती होने या दवाई खरीदने में खर्च दिए. लाखों परिवारों को बाहर से कर्ज लेना पड़ा. टीओआई में छपी खबर के मुताबिक 24 साल का सक्थि प्रशांत के पास एक साल पहले सब कुछ था लेकिन आज उसके पास कुछ नहीं है. प्रशांत मास्टर डिग्री के लिए 2020 में कनाडा जाना चाहता था. इसके लिए वह महामारी का प्रकोप कम होने का इंतजार कर रहा था लेकिन बाद में उन्हें और उनके पिता कोरोना से संक्रमित हो गए. अस्पतालों के चक्कर में सेविंग के 12 लाख रुपये खर्च हो गए. अब उनके पास कुछ भी नहीं है कि वे कनाडा जा सके. ऐसे में उनका सपना धूमिल होने लगा है. हालांकि कुछ दोस्त उनके लिए क्राउड फंडिंग की व्यवस्था में लगे हुए हैं.
66 हजार करोड़ अस्पतालों पर अतिरिक्त खर्च
प्रशांत इस मामले में अकेले नहीं है. उनके साथ देश के करोड़ों लोग हैं जिनकी मेहनत की कमाई अस्पतालों के चक्कर में जाया हो रहा है. जिंदगी बचाना लोगों की फिलहाल पहली प्राथमिकता है. इसलिए अस्पतालों में सबसे ज्यादा खर्च हो रहे हैं. हाल ही में एसबीआई SBI की एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था कि देश में इस साल लोगों ने 66,000 करोड़ रुपये अस्पतालों पर अतिरिक्त खर्च किए हैं. कोविड से पहले कभी भी हेल्थकेयर पर भारत ने इतना रुपये खर्च नहीं किया था.

आमदनी में कई गुना की कमी
सरकारी आंकड़ों में कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति ने हेल्थकेयर पर 100 रुपये खर्च किया है तो उसमें से 65 रुपये उसे अपने पास से यानी अपने पॉकेट के खर्च से किया है. चीन में यह आंकड़ा मात्र 35 प्रतिशत है जबकि थाईलैंड में हेल्थकेयर पर कोरोना के बावजूद अपने तरफ से लोगों को सौ में से 10 रुपये ही खर्च करने पड़े. SBI की रिपोर्ट के मुताबिक यह अनावश्यक खर्च लोगों को कई वजहों से करने पड़ रहे हैं. एक तो अचानक महामारी में लोगों को अस्पताल जाना पड़ रहा है, दूसरी ओऱ मेडिकल सर्विस और मेडिसीन की दर में अचानक वृद्धि कर दी. सबसे बड़ी चोट इस बात की लगी गरीब से अमीर तक हर किसी की आमदनी में कई गुना की कमी हो गई. Centre for Monitoring Indian Economy (CMIE) की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के 97 प्रतिशत लोगों की आमदनी में कमी आई है.

वर्ल्ड मिल्क डे आज: गोल्डन मिल्क पीना क्यों जरूरी

एक्सपर्ट रोजाना एक गिलास दूध पीने की सलाह देते हैं, लेकिन कई लोग नाश्ते में खाली पेट दूध लेना पसंद करते हैं। वहीं, कुछ ऐसे भी हैं जो मानते हैं कि दूध को बार-बार उबालने से उसके पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। ये दोनों ही बातें गलत हैं। आज वर्ल्ड मिल्क डे है, इस मौके पर एक्सपर्ट से जानिए दूध से जुड़े भ्रम और सच....

भ्रम: दूध ही कैल्शियम का सबसे बेहतर विकल्प है।
सच: ज्यादातर लोग इसे ही सच मानते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से सच नहीं हैं। दो चम्मच चिया सीड्स में दूध से 6 गुना अधिक कैल्शियम होता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रीशन के मुताबिक, 100 एमएल दूध में 125 मिग्रा. कैल्शियम होता है, जबकि 100 ग्राम रागी में 344 मिग्रा कैल्शियम होता है। एक्सपर्ट कहते हैं, शरीर में कैल्शियम को एब्जॉर्ब होने के लिए विटामिन-डी भी पर्याप्त मात्रा में होना जरूरी है।

भ्रम: दूध को उबालने से पोषक तत्व कम हो जाते हैं।
सच: दूध को खराब होने से बचाने के लिए उसे उबाला जाता है ताकि इसे नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया खत्म हो जाएं। इसे उबालने से इसके पोषक तत्वों पर असर नहीं पड़ता। आहार विशेषज्ञ नमिता चंदानी कहती हैं, दूध को कई बार उबालने से भी इसके पोषक तत्व नहीं खत्म होते।

भ्रम: दूध को सुबह नाश्ते में ही लेना चाहिए।
सच: आहार विशेषज्ञों के मुताबिक, दूध सुबह ले सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें इसे खाली पेट न लें। ऐसा करने से पाचन बिगड़ सकता है। गैस बन सकती है। आयुर्वेद कहता है, अगर आपको वात और कफ दोष है तो सुबह खाली पेट दूध न लें। जिन्हें अक्सर खांसी की शिकायत रहती है, उन्हें भी सुबह खाली पेट दूध लेने से बचना चाहिए।

भ्रम: दूध पीने से पेट में ऐंठन होती है।
सच: ऐसा सिर्फ उन लोगों को होता है जिन्हें दूध से एलर्जी है। आमतौर पर ऐसा नहीं होता, लेकिन कुछ चीजों के साथ दूध लेते हैं तो एसिड की समस्या हो सकती है। जैसे, फल के तुरंत बाद दूध लेने पर ऐसा हो सकता है। आहार विशेष नमिता कहती हैं, दूध में दालचीनी या हल्दी मिलाकर पी सकते हैं। यह दूध का स्वाद भी बदलता है और इम्यूनिटी भी इजाफा करता है।

भ्रम: दूध को भोजन मानकर भी पी सकते हैं।
सच: एक्सपर्ट कहते हैं, दूध को पोषक तत्वों के आधार पर कम्प्लीट फूड कहते हैं, लेकिन इसे भोजन का विकल्प नहीं बनाया जा सकता है। शरीर को विटामिन-सी, फाइबर समेत कई पोषक तत्वों की जरूरत होती है जो दूध में नहीं होते। इसलिए इसे लंच या डिनर से रिप्लेस न करें।

पिछले एक साल में देश में गोल्डन मिल्क यानी हल्दी वाला दूध पीने वालों की संख्या बढ़ी है। आयुष मंत्रालय रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने के लिए पहले ही हल्दी वाला दूध पीने की सलाह दे चुका है। ज्यादातर लोग समझते हैं कि यह सिर्फ इम्युनिटी को बढ़ाता है, जबकि ऐसा नहीं है। आयुर्वेद कहता है, गोल्डन मिल्क शरीर में दर्द को दूर करने के साथ नींद की समस्या को घटाता है और शरीर पर बढ़ती उम्र के असर को कम करता है।

आज वर्ल्ड मिल्क-डे है, इस मौके पर जानिए हल्दी वाला दूध आपके कितने काम का है...

गोल्डन मिल्क कैसे बनाएं
एक कप दूध लें। इसमें एक टेबलस्पून हल्दी, एक छोटा अदरक का टुकड़ा डालें, आधा टेबल स्पून दालचीनी पाउडर और एक चुटकी काली मिर्च पाउडर डालकर गर्म करें। धीमी आंच में इसे 10 मिनट तक उबलने दें। मिठास के लिए चीनी से बेहतर विकल्प शहद है। इसलिए इसे गैस से उतारने के बाद एक टेबलस्पून शहद डाल सकते हैं।

अब जानिए इसके फायदे
सूजन और जोड़ों का दर्द घटाता है
एक रिसर्च के मुताबिक, हल्दी वाले दूध में एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेट्री खूबियां होती हैं जो शरीर में सूजन को घटाती है। यही वजह है कि यह जोड़ों के दर्द और गठिया में राहत पहुंचाता है। रोजाना एक गिलास गोल्डन मिल्क लेते हैं तो बढ़ती उम्र में होने वाली समस्या ऑस्टियोआर्थराइटिस में फायदा पहुंचता है।

हृदय रोगों का खतरा 14% तक कम होता है
इंग्लैंड की रीडिंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, दिल की बीमारियां और स्ट्रोक का खतरा 14 फीसदी तक घटाना है तो रोजाना एक गिलास दूध पिएं। रोजाना एक गिलास दूध पीने वालों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम रहता है। इसलिए दिल की बीमारियों का रिस्क कम रहता है।

ब्लड शुगर का लेवल घटता है
ऐसे लोग जिनका ब्लड शुगर लेवल बढ़ा हुआ है वो गोल्डन मिल्क ले सकते हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए हल्दी, अदरक और दालचीनी पाउडर वाला दूध अधिक फायदेमंद है। ब्रिटेन में हुई एक रिसर्च में भी यह साबित हुआ है कि दूध पीने से ब्लड शुगर का लेवल नहीं बढ़ता।

कैंसर की आशंका घट जाती है
एक रिसर्च कहती है, हल्दी वाला दूध पीने से कैंसर का खतरा कम होता है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन तत्व कैंसर फैलाने वाली कोशिकाओं को खत्म करने की कोशिश करता है। इनके एक से दूसरे जगह पर फैलने की क्षमता को घटाता है।

बेवजह सड़कों पर घूमना पड़ेगा महंगा, सोशल मीडिया पर वायरल होंगे तस्वीर और वीडियो

मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सड़कों पर बेवजह घूमने-फिरने वालों पर नकेल कसने की तैयारी है। बड़वानी जिले में तो प्रशासन ने तय किया है कि जो लोग बेवजह घूमकर अनलॉक के प्रावधानों का उल्लंघन करेंगे, उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया व्हाटसएप पर जारी किए जाएंगे।
बड़वानी के कलेक्टर शिवराजसिंह वर्मा ने कहा है कि एक जून से हुए अनलॉक के दौरान लागु व्यवस्थाओं का पालन हर-हाल में करवाना है। इसके लिये अपने प्रभार के क्षेत्र में शिक्षको, पटवारियों सहित अन्य विभागों के मैदानी अमले की तैनाती की जाये । जो घूम-घूमकर अनलॉक के प्रावधान का उल्लंघन होने की वीडियो बनाकर उनके व्हाट्सएप पर भेजेंगे । इसके आधार पर दोषी दुकानदार पर कार्यवाही की जाये ।

वीडियो कान्फ्रेसिंग के दौरान कलेक्टर ने सभी राजस्व अधिकारियों को बताया कि उनके प्रभार के नगरों एवं बड़े कस्बो में लागू 50 प्रतिशत दुकाने खुलने के नियम का पालन अनिवार्य रूप से करवाया जाये। इसके लिये लागू सम-विषम संख्या के आधार पर दुकाने खुलने की जानकारी विभिन्न माध्यमो से दुकानदारो को दिलवाई जाये । जिससे वे अनजाने में इस नियम का उल्लंघन न करने पाएँ।

यहां दुकानों के सामने सोशल डिस्टेंस के गोले अनिवार्य रूप से बनाने के साथ सैनिटाइजर की व्यवस्था होगी। दुकान पर ''मास्क नही तो सामान नही'' का बैनर लगाना होगा, जिससे दुकानदार एवं खरीददार दोनों मास्क लगाने के नियम का पालन उल्लंघन न करने पाये ।

आईएएनएस के इनपुट के साथ

अमेरिका के एक रेस्टोरेंट : मास्क लगाने वालों को देने पड़ते हैं ज्यादा पैसे

   
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से बचाव के लिए पूरी दुनिया मास्क को बहुत जरूरी मान रही है। लेकिन मास्क को लेकर अमेरिका में एक रेस्टोरेंट के मालिक ने अजीबोगरीब नियम बनाया है। रेस्टोरेंट में मास्क लगाकर आने वाले ग्राहकों को 5 डॉलर (लगभग 363 रुपये) का एक्सट्रा चार्ज चुकाना पड़ रहा है। इस नियम को लेकर रेस्टोरेंट मालिक का कहना है कि लॉकडाउन के कारण 'सामूहिक रूप से हुए नुकसान' की भरपाई के लिए  ग्राहकों को यह भुगतान करना चाहिए।
दरअसल, कैलिफोर्निया के मेंडोकिनो में फिडलहेड कैफे के मालिक क्रिस कैसलमैन का मानना है कि लोग समाज की बेहतरी के लिए ही मास्क पहन रहे हैं। ऐसे लोगों को 5 डॉलर का एक्सट्रा चार्ज देने में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी। इस एक्सट्रा चार्ज से इक्कट्ठा हुआ पैसा चैरिटी के लिए जाएगा।
कैसलमैन कहते हैं, 'मुझे नहीं लगता है कि समाज की परवाह करने का दावा करने वाले मास्क पहने हुए लोगों से चैरिटी के लिए 5 डॉलर लेना कोई बड़ी रकम है।'
घातक कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन से रेस्टोरेंट व्यापार काफी प्रभावित हुआ है। ऐसे में इसका असर कैसलमैन के व्यवसाय पर भी पड़ा है। लॉकडाउन से हुए नुकसान की भरपाई के लिए ऐसा कदम उठाया है।
बता दें कि कैसलमैन व्यक्तिगत रूप से मास्क पहनने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि अधिकांश ग्राहक भी उनके जैसी ही सोच रखते हैं।कैसलमैन कहते हैं कि 'मैं उन्हें उनकी पसंद के मुताबिक निर्णय लेने की स्वतंत्रता देता हूं।' इतना ही नहीं कैसलमैन मास्क पहनने को अनिवार्य करना सरकार के 'अप्रभावी' उपायों का हिस्सा मानते हैं।

जंगलों में 3 हजार साल बाद नजर आया 'डेविल'


एक ओर जहां ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव के चलते कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार है वहीं ऑस्ट्रेलिया से एक राहत देने वाली खबर सामने आई है। हजारों साल गायब रहने के बाद ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में 'तस्मानिया डेविल' नाम की एक प्रजाति ने वापसी की है। इस प्रजाति के सिर्फ नाम में 'शैतान' है, असल में यह छोटे कुत्ते जैसा एक जीव है।

तस्मानिया डेविल को करीब 3000 साल के बाद देखा गया है। इस खबर के बाद पर्यावरणविद काफी खुश हैं। तस्मानिया डेविल प्रजाति की वापसी बायोडायवर्सिटी के नजरिए से बेहद अहम घटना है। तस्मानिया डेविल दुनिया का सबसे बड़ा मार्सुपियल कार्निवोर होता है। इसकी लंबाई 30 इंच तक और वजन 26 पाउंड तक होता है। हाल ही में देखे गए तस्मानिया डेविल 3000 सालों में जन्में इस प्रजाति के पहले जीव हैं।

ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया में डेविल आर्क सेंचुरी नाम की छोटी पहाड़ी को बैरिंगटन टॉप के नाम से भी जाना जात है। यहां के कुछ अधिकारियों ने तस्मानिया डेविल के 7 बच्चों को एक गड्ढे में पड़े हुए देखा। इन बच्चों के साथ उनकी मां नहीं थी। इन बच्चों को देखकर अधिकारी उम्मीद लगा रहे हैं कि आने वाले समय में इनकी आबादी बढ़ सकती है। हजारों साल पहले बड़ी मात्रा में शिकार के चलते तस्मानिया डेविल की प्रजाति विलुप्त हो गई थी। जंगली कुत्तों की प्रजाति डिंगोस तस्मानिया डेविल का शिकार करती थी जिससे डिंगोस की आबादी बढ़ गई और तस्मानिया डेविल विलुप्त हो गए। इसके फेस ट्यूमर की बीमारी के चलते भी इस प्रजाति में बड़ी संख्या में मौतें हुईं।

दुनिया जलवायु परिवर्तन के पीक पॉइंट से केवल पांच साल दूर

दुनियाभर में धरती के गर्म होने का रिकॉर्ड टूट सकता है। वैज्ञानिकों ने यह खतरा जताते हुए कहा है, 2021 से 2025 के बीच एक साल ऐसा होगा जो सबसे अधिक रिकॉर्ड गर्मी वाला होगा। 40 फीसदी तक 1.5 डिग्री तापमान बढ़ने का खतरा है। वो साल 2016 में पड़ी गर्मी को पीछे छोड़ देगा।
तापमान बढ़ने से लू, अत्यअधिक बारिश और पानी की कमी बढ़ सकती है। यह दावा अमेरिका, चीन समेत दुनियाभर के 10 देशों के वैज्ञानिकों ने वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन (WMO) की रिपोर्ट में किया है।
तापमान बढ़ने का खतरा 20% से बढ़कर 40% हुआ
पिछले एक दशक में 1.5 डिग्री तापमान बढ़ने की आशंका मात्र 20 फीसदी थी, लेकिन नई रिपोर्ट में यह खतरा अब 40 फीसदी बताया गया है। ऐसा होता है तो 2015 में हुए पेरिस जलवायु समझौते में निर्धारित तापमान से ऊपर उठ जाएगा। मौसम वैज्ञानिक लियोन हरमेंसन का कहना है, दुनिया 1.5 डिग्री तापमान बढ़ने की ओर है। इसे रोकने के लिए तुरंत एक्शन लेने की जरूरत है क्योंकि समय बीतता जा रहा है।
बर्फ पिछलेगी, समुद्रजल का स्तर बढ़ेगा
वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन के महासचिव प्रो. पेटेरी तालास के मुताबिक, बढ़ते तापमान से बर्फ पिछलेगी और समुद्र के जल का स्तर बढ़ेगा। इससे मौसम बिगड़ेगा। नतीजा, खाना, सेहत, पर्यावरण और विकास पर असर पड़ेगा। रिपोर्ट बताती है कि यह समय सतर्क होने का है। दुनियाभर में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन घटाने के लिए तेजी से काम करने की जरूरत है।
दक्षिण एशिया के लिए बढ़ेगा खतरा
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की करीब एक चौथाई आबादी दक्षिण एशिया में रहती है। यह क्षेत्र पहले से ही सबसे ज्यादा गर्मी की मार झेलता है। ऐसे में बढ़ता तापमान यहां के लिए बड़ा खतरा है। इस क्षेत्र के करीब 60 फीसदी लोग खेती-किसानी करते हैं। उन्हें खुले मैदान में काम करना पड़ता है, ऐसे उन पर लू का जोखिम बढ़ेगा।
क्या है पेरिस जलवायु समझौता
2015 में 30 नवम्बर से 11 दिसम्बर तक 195 देशों की सरकारें फ्रांस के पेरिस में इकट्ठा हुईं। सरकारों ने दुनियाभर में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने का लक्ष्य तय किया ताकि तापमान को 2 डिग्री तक कम किया जा सके।

कोरोना की वैक्सीन लगवाने वालों की इस देश में लगेगी लॉटरी, जीतने वालों को मिलेंगे करोड़ों रुपये

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से पूरी दुनिया प्रभावित है। लेकिन त्रासदी भरे हालात के बावजूद भी लोग कोरोना की वैक्सीन लगवाने से कतरा रहे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के एक गांव में वैक्सीन लगाने के लिए जैसे ही मेडिकल टीम पहुंची, तो वहां के सभी लोग नदी में कूद गए। हालांकि, दुनिया में एक जगह ऐसी भी है, जहां वैक्सीन लगवाने पर लॉटरी लग रही है।
दरअसल, कोरोना की वैक्सीन को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए अमेरिका के ओहियो में लॉटरी सिस्टम के जरिए ईनाम देने का ऐलान किया गया है। ये स्कीम ओहियो के गवर्नर माइक डेविन के द्वारा लांच किया गया है। ओहियो में जो भी टीका लगवाएगा, वो इस लॉटरी में भाग ले सकता है।
'द गार्जियन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लॉटरी जीतने वाले सभी लोगों को 10 लाख डॉलर (करीब 7.2 करोड़ रुपए) दिए जाएंगे। माइक डेविन ने बताया कि करीब 27 लाख लोगों ने पहले हफ्ते की लॉटरी के लिए आवेदन कर दिया है। बता दें कि लॉटरी में शामिल होने के लिए दो कैटेगरी बनाई गई है। पहली कैटेगरी में ओहियो के मूल निवासी और 18 साल से अधिक उम्र वाले वयस्क आएंगे, जबकि 12 से 17 साल के युवाओं के लिए अलग लॉटरी सिस्टम रखा गया है।
दूसरी कैटेगरी में विजेता के लिए कोई कैश प्राइज नहीं है। इसमें 12 से 17 साल के युवाओं को चार साल की स्कॉलरशिप दी जाएगी। इन सभी लॉटरी योजनाओं का पैसा और खर्च ओहियो प्रशासन कोविड फंड में से करेगा।
बता दें कि कोरोना वैक्सीन की लॉटरी स्कीम अमेरिका में चर्चा का विषय बानी हुई है। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने अपने एक लेख में इसे आकर्षित करने वाला विचार बताया। बता दें कि अमेरिका ने मास्क से मुक्ति का ऐलान कर दिया है। अमेरिका में ये रियायत इसलिए मिली है, क्योंकि उसने अपने 60 फीसदी आबादी को वैक्सीन की कम से कम एक डोज दे दी है।

बिना वैक्सीन प्रमाण पत्र के नहीं मिलेगी शराब

उत्तर प्रदेश के इटावा में कोरोना संक्रमण को रोकने की दिशा में वैक्सीन लगावाने को लेकर सैफई के उपजिलाधिकारी ( एसडीएम) ने एक अनूठी पहल करते हुए ठेकेदारों से कहा है कि वहर किसी को भी बगैर प्रमाण पत्र के शराब की ब्रिकी नहीं करें और इसका असर दिखाई भी देने लगा है।
उपजिलाधिकारी हेमसिंह (एसडीएम) के अनुसार शनिवार को उन्होंने ठेकेदारो से बगैर वैक्सीन प्रमाण पत्र के किसी को शराब की बिक्री नहीं करने की अपील की थी। एसडीएम की अपील के बाद अब शराब खरीदने वाले वैक्सीन लगावाने का प्रमाण पत्र लेकर आ रहे है।
सिंह ने सैफई तहसील में कोरोना वैक्सीनेशन को बढ़ावा देने की इस अनूठे प्रयोग की जमकर तारीफ हो रही है। उन्होंने शराब व बीयर ठेका संचालकों से अपील की है कि कोरोना का टीका लगवा चुके लोगों को ही शराब बेचें। इसके लिए वह समय-समय पर दुकानों की जांच भी करेंगे।
गौरतलब है कि अलीगढ़ में जहरीली शराब से हुई लोगों की मौत के बाद एसडीएम हेमसिंह और सीओ राकेश वरिष्ठ और आबकारी विभाग की टीम के साथ शराब व बीयर की दुकानों का निरीक्षण करने निकले थे। दुमीला तिराहे और गीजा गांव में दुकानों की जांच के बाद एसडीएम ने शराब दुकानों के सामने वैक्सीनेशन के लिए जागरूक करने वाले पोस्टर लगाने के निर्देश दिए।
एसडीएम ने ठेका संचालकों और सेल्समैनों से कहा कि 45 वर्ष आयु से अधिक उम्र के व्यक्ति को शराब-बीयर तभी दें जब वह कोरोना का टीका (वैक्सीनेशन) लगवाने का कार्ड दिखाए। टीका न लगवाने वाले को शराब न दें।

कोरोना: क्या है एंटीबॉडी कॉकटेल दवा? डॉ.गंगाखेड़कर बोले- म्यूटेशन रोकने में होगी मददगार

विस्तार
कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच इन दिनों 'मोनोक्लोनल एंटीबॉडी' या 'एंटीबॉडी कॉकटेल' दवा की चर्चा चल रही है। विशेषज्ञों का दावा है कि यह दवा कोरोना के खिलाफ लड़ाई में 'गेम चेंजर' हो सकती है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर) के महामारी विज्ञान और संक्रामक रोग के पूर्व प्रमुख डॉ. रमन आर गंगाखेड़कर ने कहा कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल से कोविड-19 वायरस के म्यूटेशन की संभावनाएं नहीं हैं।
आईसीएमआर के पूर्व महामारी वैज्ञानिक डॉ. रमन आर. गंगाखेड़कर कहते हैं कि आने वाले वक्त में ही पता चलेगा कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवा कोविड और उसके वैरिएंट्स के खिलाफ कितनी प्रभावी है। हालांकि, संभावना है कि इससे वायरस का म्यूटेशन नहीं होगा।
गांगुली बोले- सभी कोरोना मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं
आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. निर्मल के. गांगुली ने कहा है कि एंटीबॉडी कॉकटेल का उपयोग सिर्फ गंभीर या जान की जोखिम वाले मरीजों के लिए ही किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चूंकि यह (मोनोक्लोनल एंटीबॉडी) एक अत्यधिक महंगा उत्पाद है, इसलिए सभी संक्रमित व्यक्तियों के लिए इसका उपयोग न करें।
क्या है मोनोक्लोनल एंटीबॉडी? मोनोक्नोल एंटीबॉडी दवा दो दवाओं का मिश्रण है। इसलिए इसे एंटीबॉडी कॉकटेल दवा भी कहा जाता है। इसे दो दवाओं कासिरिविमाब और इम्देवीमाब के 600-600 एमजी का डोज मिलाकर तैयार किया जाता है। ये दवा काफी महंगी होती है। हाल ही में गुजरात की दवा कंपनी जायडस कैडिला ने ZRC-3308 के नाम से एंटीबॉडी कॉकटेल दवा बनाई है और इसके ह्यूमन ट्रायल की मंजूरी मांगी है।
किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बहुत जरूरी होती है। एंटीबॉडी प्रोटीन होते हैं, जो किसी भी बीमारी से शरीर को बचाते हैं। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को किसी खास बीमारी से लड़ने के लिए लैब में तैयार किया जाता है। कासिरिविमाब और इम्देवीमाब को स्विट्जरलैंड की फार्मा कंपनी रोशे ने बनाया है, जो कोविड के लिए जिम्मेदार सार्स-कोव-2 के खिलाफ प्रोटीन बनाती है। ये दवा शरीर में कोरोनावायरस को फैलने से रोकती है।
एंटीबॉडी दवा अमेरिका से आई है। फिलहाल इस दवा का इस्तेमाल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल और दिल्ली के फोर्टिस एस्कोर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट और अपोलो अस्पताल में किया जा रहा है। हाल ही में इस दवा से एक व्यक्ति भी ठीक हुआ है।

आज का राशिफल: मिथुन राशि वालों का बहुत ही बुरा वक्त, हो सकती है अनहोनी


मेषः- आज मेष राशिवाले रोजगार में तरक्कील करेंगे। प्रेम की स्थिति नकारात्मक है। रिश्तें किसी तरह की दरार ना आ जाए ऐसा काम ना करें।

वृषभः- आज वृषभ राशिवालों का सरकारी तंत्र से समस्या, प्रेम की स्थिति पहले से बेहतर है और भाग्य साथ देगा आपका।

मिथुनः- आज मिथुन राशिवालों की परिस्थितियां प्रतिकूल हैं। परेशानी में पड़ सकते हैं। कुछ भी अच्छा नहीं होगा। रोजगार में मध्यम गति से आप आगे चलते रहेंगे। किसी अपने से दूर ना हो ऐसी गलती ना करें।

कर्कः- आज कर्क राशिवालों को जीवनसाथी का सानिध्य मिलेगा। रोजगार में तरक्की करेंगे। प्रेम की स्थिति मध्यम है। व्याेपार सही स्थिति में चलता रहेगा।

सिंहः- आज सिंह राशिवाले शत्रुओं पर भारी पड़ेंगे। रुका हुआ काम चल पड़ेगा। व्या‍पार सही चल रहा है। संतान की स्थिति भी अच्छी है।

कन्याः - आज कन्या राशिवालों का मन परेशान रहेगा। भावुक बने रहेंगे। भावुकता में आकर कोई निर्णय न लें, नुकसान होगा। प्रेम की स्थिति मध्यम है। मन परेशान रहेगा।

तुलाः- आज तुला राशिवालों का घरेलू सुख बाधित है। गृहकलह के संकेत हो सकते हैं। व्यापार धीरे-धीरे चलता रहेगा।

वृश्चिकः- आज वृश्चिक राशिवालों का पराक्रम रंग लाएगा। जो भी आपने सोच रखा है उसे लागू करें। संतान की स्थिति पहले से बेहतर है। व्याापार आपका सही चल रहा है।

धनुः- आज धनु राशिवालों की वाणी अनियंत्रित न होने दें। पूंजी का निवेश अभी न करें। कुटुम्बीजनों से थोड़ी अनबन हो सकती है। व्यापारिक दृष्टिकोण से सही चलेंगे आप।

मकरः- आज मकर राशिवाले सितारों की तरह चमकते दिख रहे हैं। व्यापारिक दृष्टिकोण से भी आप सही चल रहे हैं। मां काली की अराधना करें।

कुंभः- आज कुंभ राशिवाले मन वित्तीय स्थिति को लेकर परेशान रहेगा। प्रेम पहले से बेहतर है। व्यापारिक दृष्टिकोण से मध्यम समय चलेगा।

घंटों टीवी देखने की आदत से दिमाग सिकुड़ सकता है, याद्दाश्त और सोचने समझने की क्षमता भी घट जाती है

घंटों टीवी देखने की आदत का सीधा असर दिमाग पर पड़ सकता है। दिमाग सिकुड़ सकता है। याद्दाश्त और सोचने-समझने की क्षमता कम हो सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है, लगातार बैठे रहने से फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है, नतीजा इसका असर दिमाग पर होता है।
यह दावा बर्मिंघम की अल्बामा यूनिवर्सिटी और न्यूयॉर्क की कोलम्बिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपनी संयुक्त रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं ने यह रिसर्च 50 से 70 साल की उम्र के लोगों पर की है। इनकी टीवी देखने की आदत का दिमाग पर क्या असर पड़ा है, इसे रिसर्च में समझने की कोशिश की गई है।
सोचने-समझने की क्षमता 6.9% घटी
45 से 64 साल की उम्र में टीवी देखने की आदत को कंटोल में रखते हैं तो भविष्य में ब्रेन स्वस्थ रहता है। शोधकर्ताओं का कहना है, रिसर्च में शामिल 10,700 लोगों के ब्रेन को स्कैन किया गया। ये टीवी कब और कितना देखने हैं, इसे जुड़े सवाल-जवाब किए गए। इनका मेमोरी, लैंग्वेज और ब्रेन स्पीड टेस्ट लिया गया। रिसर्च में सामने आया कि 70 साल की उम्र में लम्बे समय तक टीवी देखने वालों की सोचने-समझने की क्षमता 6.9 फीसदी तक घट गई।
स्टडी में शामिल लोगों का कहना था, फिजिकल एक्टिविटी और एक्सरसाइज करने पर भी उनकी टीवी देखने की आदत में कोई बदलाव नहीं आया। शोधकर्ताओं के मुताबिक, रिसर्च के दौरान सामने आया कि जो टीवी अधिक देखते हैं उनके ब्रेन में मौजूद ग्रे मैटर में कमी आई, जबकि कम टीवी देखने वालों के ब्रेन में ऐसा नहीं था।
क्या होता है ग्रे मैटर
ब्रेन में मौजूद ग्रे मैटर ही इंसान को मसल्स कंट्रोल करने, सुनने, देखने, मेमोरी और मस्तिष्क से जुड़े दूसरे काम करने में मदद करता है। ग्रे मैटर एक तरह का ब्लैक टिश्यू है जो ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड में पाया जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है, जिस इंसान में यह अधिक होता है उसकी सोचने-समझने की क्षमता दूसरों से बेहतर होती है।

कई दिनों से खांसी आ रही है तो सोने से पहले गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पिएं,

आयुर्वेद में शहद को एक औषधि माना गया है। कोरोना काल में आयुष मंत्रालय ने इसे बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने वाला बताया है। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के पंचकर्म विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जेपी सिंह कहते हैं, शहद कई तरह खनिज और विटामिन से भरपूर होता है। यह दिल, दिमाग और स्किन के लिए बहुत ही फायदेमंद है। इसे रोजाना इस्तेमाल करते हैं तो शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है और चेहरे पर निखार आता है। यह कई बीमारियों से छुटकारा दिलाने में मदद करता है।
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. जेपी सिंह बता रहे हैं शहद की पांच बड़ी खूबियां
खांसी से दिलाता है निजात
अगर आपकी खांसी कई दिनों से ठीक नहीं हो रही है तो शहद का इस्तेमाल करें। यह काफी असरकारक घरेलू दवा है। शहद में मौजूद एंटीबैक्टीरियल खूबी संक्रमण को बढ़ने से रोकती है। यह कफ को पतला करती है, जिससे वह आसानी से बाहर निकल जाता है। रात में सोने से पहले हल्के गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से खांसी को आराम मिलता है।
क्या आपको चक्कर भी आते हैं, डाइट में शहद शामिल करें
डॉ. जेपी सिंह के मुताबिक, शहद रेग्युलर लेते हैं तो सर्कुलेटरी सिस्टम बेहतर होता है। यह एनर्जेटिक और फुर्तीला भी बनाए रखता है। अगर आपको लो-ब्लड प्रेशर की शिकायत है और आप नीचे बैठे-बैठे अचानक उठने की कोशिश करते हैं तो आपको चक्कर आ जाते हैं।
लो-ब्लड प्रेशर का मतलब दिमाग में ऑक्सीजन का कम मात्रा में पहुंचना है। इसी तरह से अगर आप अपना सिर नीचे करते हैं और आपको चक्कर आते हैं तो इसका मतलब है कि आपको हाई- ब्लड प्रेशर की समस्या है। शहद का सेवन शरीर के ऐसे असंतुलन को दूर करता है।
पाचन सुधारता है और स्किन पर चमक लाता है
डॉ. जेपी सिंह के मुताबिक, आमातौर पर लोग स्किन पर चमक लाने, पाचन ठीक रखने, इम्युनिटी पॉवर बढ़ाने, और वजन कम करने के लिए शहद का उपयोग करते हैं। इसके अलावा शहद में एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जिसकी वजह से घाव को भरने में या चोट से जल्दी आराम दिलाने में भी यह कारगर है।
खून में हीमोग्लोबिन बढ़ाता है शहद
शहद और गुनगुने पानी का मिश्रण खून में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाता है, जिससे एनीमिया या खून की कमी में फायदा होता है। इससे खून में लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) की संख्या में इजाफा होता है।
शहद रक्त की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को बढ़ाते हुए सांस फूलने जैसी बीमारी को भी कम करता है। इसके साथ ही इसके सेवन से दिमाग को भी पर्याप्त आक्सीजन मिलती है, जिससे दिमाग सेहतमंद रहता है।
पोषक तत्वों का पिटारा
शहद में मुख्य रूप से फ्रक्टोज पाया जाता है। इसके अलावा इसमें कार्बोहाइड्रेट, शहद जरूरी पोषक तत्वों, खनिजों और विटामिन का भंडार है। साथ ही इसमें विटामिन बी-6, विटामिन सी, राइबोफ्लेविन और अमीनो एसिड भी पाए जाते हैं। एक चम्मच (21 ग्राम) शहद में लगभग 64 कैलोरी और 17 ग्राम शुगर (फ्रक्टोज, ग्लूकोज, सुक्रोज एवं माल्टोज) होता है।

अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा:डिप्रेशन दूर करना है तो गर्म पानी से नहाइए, यह मूड को बेहतर करता है और दवाओं के साइडइफेक्ट से भी बचाता है


अमेरिकी वैज्ञानिकों की हालिया रिसर्च कहती है, डिप्रेशन दूर करना है तो गर्म पानी से नहाइए। अमेरिका के विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी की रिसर्च में सामने आया कि डिप्रेशन के मरीज गर्म पानी से नहाते हैं तो मूड बेहतर होता है और डिप्रेशन का खतरा भी घटता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, हर 5 में से एक ब्रिटिश डिप्रेशन या बेचैनी से परेशान है। इनमें नाउम्मीदी, थकान और अनिद्रा जैसे लक्षण दिखते हैं।
30% मामलों में दवाएं भी काम नहीं करती
शोधकर्ताओं के मुताबिक, आमतौर पर मरीजों की काउंसलिंग के जरिए डिप्रेशन की वजह जानने की कोशिश की जाती है और एंटीडिप्रेसेंट दवाएं दी जाती हैं। डिप्रेशन के करीब 30 फीसदी मामलों में दवाएं भी काम नहीं करतीं। कई हफ्तों तक एंटीडिप्रेसेंट लेने से साइडइफेक्ट का खतरा भी बढ़ता है।
ऐसे हुई रिसर्च
1995 में बायोलॉजी सायकियाट्री जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, तेज बुखार डिप्रेशन से निपटने में मददगार है। इस धारणा के साथ अमेरिकी वैज्ञानिकों ने डिप्रेशन से जूझ रहे मरीजों का शरीर हीट कॉइल की मदद से 38.3 डिग्री सेंटीग्रेट तक गर्म किया। इसके एक घंटे बाद शरीर को ठंडा किया गया।
रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि 60 फीसदी मरीजों पर इसका असर हुआ। वहीं, 40 फीसदी मरीजों में पहली बार में ही असर दिखा।
जब दवाएं काम न करें तो गर्माहट दें
किंग्स कॉलेज लंदन की मनोरोग विशेषज्ञ कामाइन पेरिएंटे कहती हैं, डिप्रेशन के कुछ मरीजों में सूजन होने के कारण एंटीडिप्रेसेंट दवाएं काम नहीं करती हैं। ऐसे में डिप्रेशन से निपटने के लिए प्राकृतिक उपाय ही बेहतर है। गर्माहट के जरिए सूजन को भी कम किया जा सकता है। इसका असर दिन-प्रतिदिन घटते डिप्रेशन के रूप में दिखता है।
फल और सब्जियां भी घटाती हैं डिप्रेशन
ऑस्ट्रेलिया में 8,600 लोगों पर हुए अध्ययन में साबित हुआ कि खानपान में सब्जियां और फल खाने पर डिप्रेशन घटता है। रिसर्च करने वाली एडिथ कोवेन यूनिवर्सिटी का कहना है कि तनाव से जूझ रहे जिन लोगों ने खाने में 470 ग्राम फल और सब्जियां खाईं उनके तनाव में 10 फीसदी की कमी आई।
शोधकर्ता सिमोन रेडवेल्ली का कहना है कि रिसर्च में इस बात की पुष्टि हुई है कि फल-सब्जियों का सीधा कनेक्शन दिमाग की सेहत से है। WHO भी स्वस्थ रहने के लिए रोजाना 400 फल और सब्जियां खाने की सलाह देता है।

पटना के घाटों पर डेढ़ माह में जलाए गए 2781 कोरोना संक्रमितों के शव

 पटना: लॉकडाउन लगने के बाद श्मशान घाटों पर कोरोना संक्रमितों के शव पहुंचने की संख्या में कमी आ गई है। डेढ़ माह में पटना के तीन घाटों पर 2781 संक्रमितों के शव जलाए गए हैं। इस दौरान कई दिनों तक एक दिन में 100 से अधिक शव जलाए गए थे। मंगलवार को बांसघाट पर 25, गुलबीघाट पर 20 और खाजेकलां घाट पर चार संक्रमितों के शव जलाए गए। अब श्मशान घाटों पर शवों के कतार में रखने और बारी आने का इंतजार नहीं करना पड़ रहा है। घाटों पर शव पहुंचने के कुछ ही देर में जलाए जा रहे हैं। 

बांसघाट : डेढ़ माह में बांसघाट पर 1611 संक्रमितों के शव जले। इनमें अप्रैल में 940 तथा मई में 671 संक्रमितों के शव जलाए गए। 

गुलबीघाट :  इस अवधि में गुलबीघाट पर 945 संक्रमितों के शव जलाए गए। इनमें अप्रैल में 445 तथा मई में 470 शव जले हैं। 

खाजेकलां घाट : इस घाट पर 16 अप्रैल से कोरोना संक्रमितों के शव जलाने की प्रक्रिया शुरू हुई। यहां 225 संक्रमितों के शव जलाए गए। अप्रैल में 110 तथा मई में 115 शव जलाए गए हैं। 


अप्रैल के दूसरे सप्ताह में रोज कोरोना संक्रमितों के 40-45 शव बांसघाट पहुंचने लगे। विद्युत शवदाह गृह की एक यूनिट बंद रहने के कारण शव के अंतिम संस्कार के लिए बारी का इंतजार करना पड़ा। पटना नगर निगम ने आननफानन में बांसघाट पर दो यूनिट, गुलबीघाट पर दो तथा खाजेकलां घाट पर बंद विद्युत शवदाह गृह को चालू कराया। संक्रमितों के शव की संख्या में वृद्धि के कारण पटना नगर निगम ने लकड़ी पर नि:शुल्क शव जलाने का व्यवस्था कराई। बाहर से लकड़ी की खरीद कर भंडारण किया। तब स्थिति संभली। एक दिन तीनों घाटों पर 100 से अधिक संक्रिमतों के शव जले हैं। बांसघाट पर अधिकतम 65 शव एक दिन में जलाए गए हैं। जबकि गुलबीघाट पर यह संख्या 50 तक पहुंच गई थी। खाजेकलां घाट पर अधिकतम 20 संक्रिमतों के शव जलाए गए हैं। 

भन्सार छलीको कपडासहित नगवाका राजकुमार प्रसाद पक्राउ

६ जेठ २०७८, बिहीबार पर्सा ।
 भन्सार छली गरेर ल्याएका लत्ताकपडासहित प्रहरीले पर्साको वीरगञ्जबाट एक जनालाई पक्राउ गरेको छ ।

पक्राउ पर्नेमा वीरगञ्ज महानगरपालिका –१६ नगवाका राजकुमार प्रसाद छन् ।

ना२ह ४१६३ नम्बरको अटो गाडीमा भारतबाट भन्सार छलेर ल्याइएको १ लाख भन्दा बढीको लत्ताकपडासहित अटोलाई नियन्त्रणमा लिएको प्रहरीले जनाएको छ ।

जिल्ला प्रहरी कार्यालय पर्साका प्रवक्ता डीएसपी ओमप्रकाश खनालाका अनुसार करिव १ लाख बराबरको सर्ट, पाइन्टको कपडा, साडी, लेहंगालगाएत लत्ताकपडा र ४ लखा मुल्य बराबरको अटो गाडीसहित पक्राउ परेका व्यक्तिलाई भन्सार कार्यालयमा बुझाइएको छ ।

वीरगंजकी उपमेयर ९१ वर्षीया शान्ति कार्कीले कोरोना जितिन्

फोटोः मेयर विजय सरावगीले फूलको गुच्छा दिएर उपमेयर कार्कीको स्वागत गर्दै । तस्वीरः सौजन्य
वीरगंज, ६ जेठ । 
वीरगंज महानगरपालिकाकी उपप्रमुख ९१ वर्षीया शान्ति कार्कीले कोरोनालाई परास्त गरेकी छिन् । 
कोरोना संक्रमणपछि वीरगंज महानगरको आइसोलेशनमा भर्ना भइ उपचार गराउंदै आएकी उपप्रमुख कार्की आज बिहान कोरोनामुक्त भई घर फर्केकी हुन् ।  दुर्ई साताअघि उनलाई कोरोना देखिएको थियो ।
बुधवार गरिएको स्वाब परीक्षणको रिपोर्ट नेगेटिभ आएपछि महानगरका मेयर विजयकुमार सरावगीले उपमेयर कार्कीलाई स्वागत गर्दै घर लगेका हुन् । महानगरको आइसोलेशनमा १३ दिन आइसोलेट भएकी कार्कीको रिपोर्ट नेगेटिभ आएपछि उनलाई डिस्चार्ज गरिएको मेयर सरावगीले बताए । उपमेयर कार्कीलाई आइसोलेसन बस्दा धेरै समस्या देखिएन। उनको रेखदेख गर्न एक जना चिकित्सक राखिएको र अक्सिजनलगायत केही पनि आवश्यक नभएको बताइन्छ । 
२०७४ सालमा भएको निर्वाचनमा नेपाली कांग्रेसबाट कार्की उपमेयर निर्वाचित भएकी थिइन। कार्की महानगरको उपमेयर निर्वाचित हुने सबैभन्दा बढी उमेरकी व्यक्ति हुन। 

वीरगंजमा ८२ मा संक्रमण पुष्टि

वीरगंज, ६ जेठ ।
बुधबार २८८ जनाको स्वाबको पिसिआर परिक्षण गरिएकोमा मात्र ८२ जनामा कोरोना संक्रमण पुष्टि भएको नारायणी अस्पतालका कोभिड संयोजक डा. सरोज रोशन दासले बताएका छन् । 
सङ्क्रमितमध्ये पर्साका ४३ जना, बाराका २२ जना, ७÷७ जना रौतहट र सर्लाही र १÷१ जना धनुषा, महोत्तरी र सप्तरीका बासिन्दा पनि छन् ।

सङ्क्रमितहरुको उमेर समूह १७ वर्षदेख ७० वर्ष रहेको छ भने उनीहरुको सिटि भ्यालु १४ देखि ३५.४ सम्म रहेको छ ।