पटना के घाटों पर डेढ़ माह में जलाए गए 2781 कोरोना संक्रमितों के शव

 पटना: लॉकडाउन लगने के बाद श्मशान घाटों पर कोरोना संक्रमितों के शव पहुंचने की संख्या में कमी आ गई है। डेढ़ माह में पटना के तीन घाटों पर 2781 संक्रमितों के शव जलाए गए हैं। इस दौरान कई दिनों तक एक दिन में 100 से अधिक शव जलाए गए थे। मंगलवार को बांसघाट पर 25, गुलबीघाट पर 20 और खाजेकलां घाट पर चार संक्रमितों के शव जलाए गए। अब श्मशान घाटों पर शवों के कतार में रखने और बारी आने का इंतजार नहीं करना पड़ रहा है। घाटों पर शव पहुंचने के कुछ ही देर में जलाए जा रहे हैं। 

बांसघाट : डेढ़ माह में बांसघाट पर 1611 संक्रमितों के शव जले। इनमें अप्रैल में 940 तथा मई में 671 संक्रमितों के शव जलाए गए। 

गुलबीघाट :  इस अवधि में गुलबीघाट पर 945 संक्रमितों के शव जलाए गए। इनमें अप्रैल में 445 तथा मई में 470 शव जले हैं। 

खाजेकलां घाट : इस घाट पर 16 अप्रैल से कोरोना संक्रमितों के शव जलाने की प्रक्रिया शुरू हुई। यहां 225 संक्रमितों के शव जलाए गए। अप्रैल में 110 तथा मई में 115 शव जलाए गए हैं। 


अप्रैल के दूसरे सप्ताह में रोज कोरोना संक्रमितों के 40-45 शव बांसघाट पहुंचने लगे। विद्युत शवदाह गृह की एक यूनिट बंद रहने के कारण शव के अंतिम संस्कार के लिए बारी का इंतजार करना पड़ा। पटना नगर निगम ने आननफानन में बांसघाट पर दो यूनिट, गुलबीघाट पर दो तथा खाजेकलां घाट पर बंद विद्युत शवदाह गृह को चालू कराया। संक्रमितों के शव की संख्या में वृद्धि के कारण पटना नगर निगम ने लकड़ी पर नि:शुल्क शव जलाने का व्यवस्था कराई। बाहर से लकड़ी की खरीद कर भंडारण किया। तब स्थिति संभली। एक दिन तीनों घाटों पर 100 से अधिक संक्रिमतों के शव जले हैं। बांसघाट पर अधिकतम 65 शव एक दिन में जलाए गए हैं। जबकि गुलबीघाट पर यह संख्या 50 तक पहुंच गई थी। खाजेकलां घाट पर अधिकतम 20 संक्रिमतों के शव जलाए गए हैं। 

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